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Navigating the Grid: A Complete Guide to Indian Railways' Zonal Hierarchy. Indian Railway Zone Extending across more than 68,000 kilometers of track, Indian Railways ranks among the planet's vastest transit networks. Overseeing such an extensive system from a single central command would create immense logistical bottlenecks. To ensure operational precision, safety standards, and regional responsiveness, the Ministry of Railways delegates governance through a decentralized structure of Railway Zones . Each zone operates as a semi-autonomous entity led by a General Manager (GM). These zones are further segmented into smaller localized territories known as Divisions , which are overseen by Divisional Railway Managers (DRMs). Comprehensive Breakdown of the 19 Zonal Divisions 1. Northern Railway (NR) Headquarters: New Delhi | Code: NR Operational Divisions: Delhi, Ambala, Firozpur, Lucknow (NR), Moradabad Profile: Covers the northern plains and holds the record for the larges...
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गोलकोंडा भारत का सबसे रहस्यमयी किल्ला, हैदराबाद (Golconda A Mysterious Fort of India)
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गोलकोंडा भारत का सबसे रहस्यमयी किल्ला, हैदराबाद (Golconda A Mysterious Fort of India)
Golkonda Fort Hyderabad
गोलकोंडा भारत के सबसे प्रमुख किलो में से एक माना जाता है गोलकोंडा किले का महत्व भारत के इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण किले में से एक है। ना केवल ये किला भारत के सदियों से हो रहे उथल-पुतल का साक्षीदार है बल्कि यस किले का भारत का इतिहास बदलने के साथ साथ कोहिनूर जैसे मूल्यवान हिरे भी इसी किले की उपज है। इतिहासकारो की माने तो इस किले का निर्माण १४ वी शताब्दी में वारंगल के काकतिया हिन्दू राजाओ ने किया था पहिले इस किले का निर्माण मिटटी से किया गया था बाद में इस किले पर बहमनी सुल्तानों ने कब्ज़ा किया किया ,बाद में क़ुतुबशाह और बहमनी राजाओ ने इस किले की मरम्मत की और इसे ४०० फ़ीट की पहाड़ी पर ग्रेनाइट की चट्टानों में बनाया। सन १५१८ से लेकर संन १६८७ तक गोलकोण्डा पर क़ुतुबशाही सल्तनत का राज रहा जिसमे १५६८ से लेकर १५९० तक गोलकोण्डा क़ुतुबशाई की राजधानी था। इस काल में कई सरे क़ुतुबशाह बने लेकिन इन सब में सबसे प्रमुख और महत्वपूर्ण था वो पांचवा सुल्तान मोहम्मद कुली क़ुतुब शाह (सन १५६५-१६१२) ये सुल्तान उसकी हिन्दू प्रजा में काफी मशहूर था उसने अपनी पत्नी भागमती के नाम से गोलकोण्डा किले के बाजु में भाग्यनगर शहर की स्थापना की जिसका आगे जाकार नाम 'हैदराबाद' कर दिया।
Charminar Hyderabad
कुली क़ुतुबशाह ने किले के अंदर एक जगदम्बा महाकाली मंदिर बनाया जो की हिन्दू मुस्लिम भाईचारे की निशानी है। सोलवी शताब्दी के बाद से १९४८ आखरी निजाम तक गोलकोंडा पर मुस्लिम राजाओ का राज रहा लेकिन किसी भी मुस्लिम राजा ने मंदिर तोडा नहीं और न ही इसकी गरिमा को ठेच पोहचाई । मंदिर के आलावा किले के अंदर कई सारी वास्तुये है जो की दिखने लायक और रहस्यमहि है जिनमे सबसे प्रमुख है तारामती मस्जिद ,रामदास बंदीखाना,नगिनाबाग दरबार हॉल और बरदारी अम्बर खान है। इस किले को लगभग १२ किमी की तटबंदी दीवार है। ईस किले की विशिष्ट रचना इस किले को देश के बाकि किलो से अलग और बेहद की खास बना देती है। इस किले में पहुंचने के लिए ८ प्रवेशद्वार ४ उठावु पूल और दुश्मन पर नजर रखने के लिए ८७ बुर्ज बनाये थे,किले मे कई सारे महल और हॉल है ।
Golkond fort Hyderabad.
सबसे निचे फ़तेह दरवाजा है जिसे विजयद्वार भी कहा जाता इस दरवाजे पर अनमोल लोहे की किले जड़ी है। गोलकोण्डा में कई सारे आकर्षक और अद्भुत वास्तुये है जो आज भी एक पहेली ही है,जैसे की किला का वाटर सिस्टम जिसे 'रहबाट' के नाम से जाना जाता है।
Golkonda Fort Hyderabad
लेकिन सबसे रहस्यमय जगा है वो 'तालिया मंडप' जिसे आधुनिक ध्वनि अलार्म भी कहा जाता है ,तालिया मंडप क़िसी रहस्य से कम नहीं है यंहा का ध्वनि विज्ञानं किसी को भी अचरच में डाल सकता है। यह जगह किले के विजयद्वार के नजदीक है इस मंडप में अगर ताली बजाते है तो वो किले के सबसे ऊपरी महल में सुनाई देती है जो की यंहा से ४३५ फ़ीट दूर है। ये उस वक्त अलार्म का काम करती थी अगर कोई राजा से मिलाने आता था तब इसी मंडप से सुलतान को उसके मौजूदगी का एहसास होता था ऐसा ही उसका इस्तेमाल दुश्मन से बचने के लिए भी होता था।यंहा की कोई भी आवाज २ किलोमीटर से भी सुनी जा सकती थी।
गोलकोण्डा के नए किले के इलाके में एक अफ्रीकन बाओबाज़ का पेड़ जिसे स्थानिक भाषा में हथिया पेड़ भी कहा जाता है। माना ये जाता है की ये पेड़ ४२७ साल पुराना है इतिहासकारो की माने तो ये पेड़ कुछ अरब व्यापारियोंने सुलतान कुली क़ुतुब शाह को उपहार के स्वरुप में दिया था।
Biobaz Tree Golkonda
ऐसा माना जाता है की किले में एक रहस्यमयी सुरंग है ये सुरंग किले के सबसे निचले भाग से होकर किले के बहार निकलती है ,आपातकाल में शाही परिवार के लोगो को सुरक्षित बाहर पोहचने के लिए बनायीं गई थी लेकिन अब तक इस सुरंग का कोई पता नहीं चला।
गोलकोण्डा किला कई सारे साम्राज्ज्यो के उत्थान और पतन का साक्षी रहा है,लेकिन यंहा की सबसे चर्चित और देश के गिने चुने बड़ी लढाई में शामिल है। क़ुतुबशाही के आखरी सुल्तान अबुल हसन क़ुतुब शाह और मुग़ल बादशाह औरंगजेब के बिच 1687 में लढी गयी गोलकोण्डा की लढाई। औरंगजेब की जीत के साथ १६९ साल से चली आ रही क़ुतुबशाही की सुल्तनत ख़तम हुवी।
Battle Of Golkonda Hyderabad
इतिहासकरो की मानें तो औरंगजेब ने गोलकोण्डा पर अपने ९०००० हजार सैनिक ५०००० घुड़सवार ,२४० तोफ के साथ धाबा बोल दिया था। गोलकोण्डा को १७ वि शताब्दी में हीरो की राजधानी कहा जाता था,यंहा की कोल्लूर की खदानों से कई सर्वोत्तम हिरे मिले थे जिसमे कोहिनूर भी शामिल था इसी वजह से औरंगजेब सहित कई शासक गोलकोण्डा पर कब्ज़ा करना चाहते थे ।
Diamond
आठ बार हमला करने के बावजूद भी गोलकोंडा किला अभेद्य रहा किले के अंदर घुसने की हर चल नाकाम होने पर औरंगजेब ने पैसो का रास्ता चुना । कुतुबशाही के सेनापति सरनदाज खान को किले के पिछले दरवाजा खोलने के लिए रिश्वत दी गयी और औरंगजेब की ये चाल कामयाब हुवी और पिछले दरवाजे से मुग़लो ने किले पर धाबा बोल दिया। ८ महीने के कड़े संघर्ष के बाद अबुल हसन कुतुबशाह ने मुघलो के सामने हथियार डाल दिए।अबुल हसन को गिरफ्तार कर दौलताबाद के किले पर बंदी बना कर रखा गया १३ साल के बंद कारावास में ही कुतुबशाह की मौत हुवी । गोलकोंडा किलेसे १ किमी की दूरी पर कुतुबशाही राज परिवारों का कब्रगाह है जिसमे सारे शाही परिवार के सदस्यों की कबरे बनाई है ये दुनिया की सबसे आलीशान और बड़ी कब्रगाह में से एक है।सुल्तान अबुल हसन क़ुतुब शाह को तो अपनी वतन की मिटटी भी नसीब नहीं हुवी।
हजरत ख्वाजा शेख फरीद शकरगंज गड शरीफ,उस्मानाबाद (Gad Sharif Osmanabad) हजरत ख्वाजा शेख फरीद शकरगंज गड शरीफ,उस्मानाबाद .उस्मानाबाद शहर से औरंगाबाद रोड पर १२ किमी की दूरी पर स्थित ये एक मशहूर दरगाह हैं, जंहा पर अपनी मन्नत मांगने के लिए हजारो की तादात पे श्रद्धालु हर दिन यँहा आते हैं । पहाड़ी से घिरे होने के कारण इसकी खूबसूरती देखने लायक होती है,यंहा से उस्मानाबाद रेलवे का मराठवाड़ा का सबसे ऊँचा ब्रिज और टनल का बेहद ही खूबसूरत नजारा दिखाई देता है। पूरा वीडियो देखने के लिए यंहा क्लीक करे.
तमिलनाडु घूमने के प्रमुख दस पर्यटन स्थल. Top 10 Tourist Attractions in Tamil Nadu. Kodaikanal तमिलनाडु दक्षिण भारत का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण राज्य है । तमिलनाडु दुनियाभर में अपने मंदिर के स्थापत्य कला के लिए जाना जाता है । वैसे देखा जाये तो तमिलनाडु में पर्यटकों को देखने लायक हर तरह के पर्यटन स्थल है समुद्री तट,खूबसूरत और भव्य पुरातन मंदिर,हिल स्टेशन मॉडर्न शहर .राष्ट्रीय उद्यान एंव वन्य जिव अभयरण्य तो चलिए इस ब्लॉग में हम जानते है तमिलनाडु में घूमने के प्रमुख दस पर्यटन स्थल। १० चिदंबरम Natraj Temple Chidambaram TamilNadu चिदंबरम चेन्नई से २१७ किमी और कांचीपुरम से १८९ किमी पर स्थित चिदंबरम कुड्डालोर जिले का एक तीर्थ शहर है। चिदंबरम नटराज मंदिर के लिए जाना जाता है, ये दक्षिण भारत में सबसे प्रसिद्ध तीर्थस्थलों में से एक है।चिदंबरम नटराज मंदिर 11 वीं शताब्दी के दौरान बनाया गया था और यह दक्षिण भारत में सबसे प्रसिद्ध शैव मंदिरों में से एक है। भगवान नटराज विक्रम चोल (1128 CE) और उनके उत्तराधिकारियों क...
त्रिविक्रम मंदिर (बौद्ध चैत्य गृह) तेर ,उस्मानाबाद भारत का सबसे प्राचीन मंदिर. Trivikram Mandir Ter Osmanabad,Maharashtra त्रिविक्रम मंदिर ये है भारत का सबसे प्राचीन मंदिरोमेसे एक है जो महाराष्ट्र के उस्मानाबाद शहर केवल २२ किमी की दूरी स्थित तेर गाव में हैं। सातवाहन राजाओ के समय ईस गांव का दायरा काफी बड़ा था और ये शहर भारत के प्रमुख शहरो में गिना जाता था ,तेर का उल्लेख इतिहास में 'तगर' के मिलता हैं,ये शहर सातवाहन राज्य की उपराजधानी भी हुवा करता था। तेर गांव के बीचोबीच एक बहुत ही रहस्यमय मंदिर हैं जो की भगवान त्रिविक्रम को समर्प्रित हैं। ईसी कारण रहस्य्मय है क्यों की ईस मंदिर की रचना आम हिन्दू मंदिरो की तरह नहीं हैं। कई इतिहासकारो का मानना है की ये एक प्राचीन बौद्ध चैत्य गृह है जिसका निर्माण मशहूर इतिहासकार कजिन्स के अनुसार ईसा ४ थी और इतिहासकार पर्सी ब्राऊन के अनुसार पांचवी सदी में किया गया था। त्रिविक्रम मंदिर तेर उस्मानाबाद महाराष्ट्र ईस चैत्य गृह का निर्माण पूरी तरह से ईटो से किया गया था,और ऊपर से चुने का प्लास्टर किया हैं और ईस तरह की ...
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