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भारत के ऐतिहासिक मंदिर/प्रार्थनास्थल INDIA'S HITORICAL TEMPLES लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

Navigating the Grid: A Complete Guide to Indian Railways' Zonal Hierarchy.

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  Navigating the Grid: A Complete Guide to Indian Railways' Zonal Hierarchy. Indian Railway Zone Extending across more than 68,000 kilometers of track, Indian Railways ranks among the planet's vastest transit networks. Overseeing such an extensive system from a single central command would create immense logistical bottlenecks. To ensure operational precision, safety standards, and regional responsiveness, the Ministry of Railways delegates governance through a decentralized structure of Railway Zones . Each zone operates as a semi-autonomous entity led by a General Manager (GM). These zones are further segmented into smaller localized territories known as Divisions , which are overseen by Divisional Railway Managers (DRMs). Comprehensive Breakdown of the 19 Zonal Divisions 1. Northern Railway (NR) Headquarters: New Delhi | Code: NR Operational Divisions: Delhi, Ambala, Firozpur, Lucknow (NR), Moradabad Profile: Covers the northern plains and holds the record for the larges...

कामख्या मंदिर गुवाहाटी असम KAMAKHYA TEMPLE GUVAHATI ASSAM

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 कामख्या मंदिर ,गुवाहाटी, असम KAMAKHYA TEMPLE GUVAHATI ASSAM  पुरे देश में माता पार्वती के ५१ शक्तिपीठे है इनमेसे कुछ प्रमुख विशेष महत्त्वपूर्ण और रहस्यमय  हैं ,इनमे से माता कामख्या एक हैं कामख्या मंदिर असम की राजधानी गुवाहाटी में ब्रम्हपुत्र नदी के किनारे स्थित हैं जो की मुख्य शहर से ९ किमी दूर हैं।  जिस पहाड़ी पर कामख्या मंदिर मौजूद है, उसे नीलांचल या ब्लू हिल के नाम से जाना जाता है। वर्तमान कामख्या मंदिर,जिसे १५६५ ईस्वी में ११ वीं १२ वीं शताब्दी के पुराने  पत्थर के मंदिर के खंडहरों का उपयोग करके  दो अलग-अलग शैलियों के संयोजन से पुनर्निर्माण किया गया था। कामाख्या मंदिर पारंपरिक नगाड़ा याने  उत्तर भारतीय और सारसेनिक याने  मुगल शैली का अनूठा मिक्सचर हैं। इस अनोखे संयोजन शैलियों को अब नीलांचल स्टाइल ऑफ आर्किटेक्चर का नाम दिया गया है , आसाम एंव उत्तर भारत में कई  सारे मंदिर इस शैली में बनाये गए हैं ।   प्रचलित कथा के अनुसार देवी सती ने भगवान शिव से शादी की. इस शादी से सती के पिता राजा दक्ष खुश नहीं थे. एक बार राजा ...

माता सप्तश्रृंगी वणी नाशिक महाराष्ट्र SAPTSHRUNGI VANI NASHIK MAHARASHTRA

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माता सप्तश्रृंगी ,वणी नाशिक महाराष्ट्र SAPTSHRUNGI VANI NASHIK MAHARASHTRA  पुरे देश के माता के पार्वती  ५१  शक्तिपीठे है  जिनमे  से महाराष्ट्र में  माता के कुल साडेतीन शक्ती पीठ है जिंमे उस्मानाबाद जिले के  तुळजापुर  में स्थित मा तुळजाभवानी  ,नांदेड के माहूरगढ पर बसी माँ  रेणुका देवी  कोल्हापूर में स्थित माता  महालक्ष्मी  और नाशिक जिले के वणी मी बसी  माता  सप्तशृंगी ये साडेतीन शक्ती पीठ है। इनमे से आज हम इस वीडियो में दर्शन करने वाले है नाशिक जिले के वणी में बसी माता सप्तश्रृंगी का, सप्तश्रृंगी पोहचने के लिए सबसे नजदीकी रेल्वे स्टेशन है निफाड़ जो यंहा  से ३९ किमी  दूर हैं नाशिक यंहा का सबसे नजदीकी हवाई अड्डा है जो की यंहा से ५५ किमी हैं।   माता सप्तश्रृंगी का यह  मंदिर एक अर्धशक्तिपीठ है,महाराष्ट्र के नाशिक जिले के वणी  में माता सप्तशृंगी विराजमान है। नासिक से करीब 55 किलोमीटर की दूरी पर 4800 फुट ऊंचे सप्तश्रृंंगी पर्वत पर माता का मंदिर हैं । सप्तश्रृंगी मंदिर स्थित मां की ...

रेणुकादेवी माहूरगढ़ ,नांदेड़ महाराष्ट्रा (RENUKADEVI MAHURGADH NANDED MAHARASHTRA)

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 रेणुकादेवी माहूरगढ़ ,नांदेड़ महाराष्ट्रा  (RENUKADEVI MAHURGADH NANDED MAHARASHTRA) पुरे देश के माता के पार्वती  ५१  शक्तिपीठे है  जिनमे  से महाराष्ट्र में  माता के कुल साडेतीन शक्ती पीठ है जिंमे उस्मानाबाद जिले के तुळजापुर  में स्थित मा तुळजाभवानी ,नांदेड के माहूरगढ पर बसी माँ  रेणुका देवी कोल्हापूर में स्थित माता  महालक्ष्मी और नाशिक जिले के वणी मी बसी  माता  सप्तशृंगी ये साडेतीन शक्ती पीठ है। इनमे से आज हम  इस विडिओ दर्शन करणे वाले है माहूरगढ मी बसी माता रेणुकादेवी माता रेणुकादेवी इक पूर्ण शक्ति पीठ है।  महाराष्ट्र के नांदेड़ शहर  से माहरगढ़  लगभग १२६ किमी दूर है और मुंबई से माहूरगढ़ की दुरी लगभग ६४६ किमी हैं। माहुरगढ़ पहुंचने के लिए सबसे नजदिये रेलवे सेशन किनवट है जो की यंहा से ५० किमी दूर है, तो वही नादेंड यंहा का सबसे नजदीकी हवाई अड्डा है।  माहुरगढ़ की रेणुका माता भगवान विष्णु के अवतार माने जाने वाले भगवान परशुराम की माता थी पुराणों की माने तो रेणुका माता का विवाह जमदग्नि ऋषि के साथ हुवा था जमदग्नि ऋष...

खजुराहो के मंदिर (बुंदेलखंड) मध्यप्रदेश TEMPLES OF KHAJURAHO MADHYA PRADESH

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खजुराहो(बुंदेलखंड) मध्यप्रदेश  Kandaria Mahadev Temple Khajuraho Madya Pradesh नमस्काए दोस्तों और आपका स्वागत है Travloger.com  में आज हम इस ब्लॉग में सैर करने वाले है एक  एसे ही खूबसूरत ऐतिसाहिक मंदिरो की जीने कई सारे  लोक खूबसूरती का बेजोड़ नमूना मानते है तो कई सारे लोक इसे केवल भगवान के नाम पर अश्लीलता फैलाने के आरोप करते है लेकिन जो भी हो ये मंदिर पिछले लगभग हजार सालो के भारत का गौरव दुनिया में अपनी अद्भुत शिल्पकारी से बढ़ा रहे है...  जी हा सही पहचाना हम बात कर रहे है मध्यप्रदेश में बसे खजुरहो के विश्व धरोहर मंदिरो की।  खजुराहो भारत में मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड में स्थित एक प्रमुख शहर है जो अपने प्राचीन एवं मध्यकालीन मंदिरों के लिये विश्वविख्यात है। खजुराहो को प्राचीन काल में 'खजूरपुरा' और 'खजूर वाहिका' के नाम से भी जाना जाता था। खजुराहो के आस पास के एरिया में  काफी  मात्रा में खजुर के पेड़ थे और इसी कारण इस जगह का नाम खजुराहो पड़ा । खजुराहो मंदिर अपने अद्भुत शिल्प कौशल और अकल्पनीय मूर्तिकला के लिए दुनिया भर में मशहूर हैं। इन मंदिरों की द...

SOMNATH TEMPLE VERAVAL GUJRAT

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SOMNATH TEMPLE VERAVAL,GUJRAT Somnath is the Jyotirlinga of the first of the sacred 12 Jyotirlingas of India, Somnath is situated on the shore of the Arabian Sea in Saurashtra, Gujarat. Due to its religious importance and natural habitat, lakhs Pilgrimage come here to seek the blessings of Lord Somnatha. The history of construction of Somnath temple is very large, this temple was broken and built many times in history.In history, Mohammad Ghazni, Allauddin Khilji, Mohammad Begada, Aurangzeb looted and destroyed this temple, but every time this temple was built. The first Yadavas of Vallabhi built this Somnath temple in the year of 669 AD. The first mention of damage to this temple in 625 AD is found in the history of India and the last time Aurangzeb destroyed the temple in 1701 and built a mosque there, later the mosque was relocated and the present temple was built in the year of 1951 after Junagadh State has been merged in India. The construction work of the present temple was start...

ASHTAVINAYAK GANPATI, MAHARASHTRA

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ASHTAVINAYAK GANPATI MAHARASHTRA. Lord Ganesh holds the position of the first deity in Hinduism, there are eight ancient temples of Lord Ganesha in Maharashtra which is called Ashtavinayak . Out of eight temples, 5 in Pune district, two in Raigad district and one temple comes in Ahmednagar district, so in this blog, we will every things  about Ashtavinayak . 1  Moreeshwar  Morgaon   Located on the Pune-Baramati road, 60 km away from Pune, this Lord Ganesh is known as Moreeshwar , in the Puranas, Lord Ganesha came to this place by sitting on the Peacock (Peacock). That is why Ganesha got the name Moreshwar. | Ganesha is decorated with the Dimonds in the idol's eyes and navel. Moreshwar has the first place in Ashtavinayak. 2  Siddivinayak Siddhatek  This is a very beautiful temple of Siddhivinayak in the village of  Huve  situated on the banks of Bhima river in Karjat tahsil place of Ahmednagar district, it was renovated by Punyashlok Ahilyabai H...

सोमनाथ प्रथम ज्योतर्लिंग सौराष्ट्र ,गुजरात SOMNATH FIRST JYOTIRLINGA SOURASHTRA GUJRAT

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सोमनाथ प्रथम ज्योतर्लिंग सौराष्ट्र ,गुजरात SOMNATH FIRST JYOTIRLINGA SOURASHTRA GUJRAT. सोमनाथ भारत के पवित्र १२ ज्योतिर्लिंगों में से प्रथम क्रमांक का ज्योतर्लिंग है, सोमनाथ गुजरात के सौराष्ट्र में अरब सागर के किनारे बसा है । अपने धार्मिक महत्त्व और प्राकृतिक आवास के कारण  हर साल लाखों  भाविक भगवान सोमनाथ का आशीर्वाद लेने यँहा आते हैं। सोमनाथ मंदिर के  निर्माण का इतिहास बहुद बड़ा है,ईस मंदिर को इतिहास में कई बार तोडा और बनाया गया। इतिहास में मोहम्मद गझनी,अल्लाउद्दीन खिलजी,मोहम्मद बेगड़ा,औरंगजेब ने इस मंदिर की लूट एंव नाश किया था लेकिन हर बार ईस  मंदिर का निर्माण करवाया गया। सबसे प्रथम  वल्लभी के यादवो ने साल ६६९ में इस सोमनाथ मंदिर का निर्माण किया था।  सर्वप्रथम ७२५ में ईस मंदिर को क्षति पोहचने का जिक्र भारत के इतिहास में मिलता है और आखरी बार औरंगजेब ने १७०१  में ईस मंदिर को पुरी तरह से नष्ट करके वंहा पर मस्जिद भी बनायीं थी, बाद में मस्जिद को स्थलांतरित करके  वर्तमान मंदिर का निर्माण १९५१ में जूनागढ़ रियासद का भारत में विली...

गुजरात का खजुराहो,मोढेरा का सूर्य मंदिर GUJRAT'S KHAJURAHO SUN TEMPLE OF MODHERA

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गुजरात का खजुराहो,मोढेरा का सूर्य मंदिर  SUN TEMPLE,MODHERA GUJRAT'S KHAJURAHO गुजरात के मेहसाना  जिले  के मोढेरा में स्थित सूर्य मंदिर देश के सबसे खूबसूरत मंदिरों में से एक हैं। मेहसाना से केवल ३५ किमी पश्चिम दिशा मोढेरा में  पुष्पवती नदी के किनारे ईस मंदिर का निर्माण सोलंखी राजा भीमदेव प्रथम ने १०२६ के आसपास किया था भीमदेव की राजधानी पाटण यंहा से  केवल ३० किमी दूर थीं। ये मंदिर अपनी स्थापत्यकला और  मूर्तिकला के लिए जाना जाता है। ईस मंदिर की और एक खासियत है ओ ये की निर्माण में किसी भी जगह चुने का इस्तेमाल नहीं किया है। सूर्य मंदिर तीन विभागो में विभाजित है मुख्य गर्भगृह,सभामंडप और सामने सूर्य कुंड जिसे रामकुंड  भी कहा जाता हैं।  सभा मंडप के ठीक सामने सूर्यकुंड याने बावड़ी का निर्माण किया हैं, ये सूर्यकुंड सीड़ियाँ के अनोखे ज्यामितीय आकार में बनायी गयी हैं। ईसकी सीड़ियों पर कई छोटे बड़े मंदिरों की स्थापना की गयी है। सूर्य मंदिर के ठीक सामने की सीड़ियों पर शेषशैय्या पर विराजमान भगवान् विष्णु का मंदिर है। ईस सूर्य कुंड की सीढ़ियों पर कु...

लाड़खान मंदिर ,ऐहोले कर्नाटक Ladhkhan Temple ,Aihole,Karnataka ಲಡಖಾನ್ ಟೆಂಪಲ್ ,ಐಹೊಳೆ

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लाड़खान मंदिर ,ऐहोले कर्नाटक Ladhkhan Temple ,Aihole,Karnataka. ऐहोले कर्नाटक के बदामी शहर से केवल ३३ किमी की दुरी पर बसा है ।  ऐहोले ये अपने हिन्दू मंदिरो के लिए मशहूर है यंहा पर कुल १२५ हिन्दू मंदिर हैं। लेकिन इनमेसे सबसे लोकप्रिय और विशेष अगर कोई मंदिर है तो वो है दुर्गा मंदिर और लाडखान मंदिर। लाड़खान मंदिर ऐहोले का सबसे पुराणा  मंदिर माना जाता हैं ईसका निर्माण सम्भयावता पांचवी सदी में चालुक्य सम्राट पुलकेशी प्रथम ने किया था। ये मंदिर दो मंजिला ये मंदिर मूल रूपसे एक सूर्य देव को समर्पित मंदिर है लेकिन बाद में इसे शिव मंदिर में परिवर्तित किया गया हैं। ईसका छत समतल हैं इसके ऊपर कोई शिखर नहीं है। विजापुर के आदिलशाह के वजीर दक्षिण में मोहिंम पर जब था तो उसने इस मंदिर का उपयोग अपने रहने के लिए किया था और वो ईस क्षेत्र में काफी लोकप्रिय हुवा  ईसी कारण ईस मंदिर को उसीके नाम से याने लाडखान  मंदिर के नाम से जाने जाना लगा।  ये मंदिर प्राचीन पंचयतना स्थापत्य शैली में बनाया गया था जो की इतिहास में प्रचलित थी लेकिन ये ज्यादा लोकप्रिय नहीं हुवी।...

दुर्गा मंदिर ऐहोले (बदामी ), बागलकोट,कर्नाटका Durga Temple Aihole( Badami) Bagalkot Karnataka

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 दुर्गा मंदिर ऐहोले (बदामी ), बागलकोट कर्नाटका Durga Temple Aihole( Badami) Bagalkot, Karnataka ऐहोले कर्नाटका के बागलकोट जिले में बसा एक ऐतिहासिक स्थल है जो कभी चालुक्य राज्य की राजधानी हुवा करती था। बागलकोट से और बादामी से ऐहोले केवल ३३  किमी दुरी पर बसा है। ऐहोले में कुल १२३ से ज्यादा मंदिर है लेकिन यंहा का सबसे खूबसूरत और महत्वपूर्ण मंदिर अगर कोई है तो वो हैं दुर्गा मंदिर। मराठा राज्य के समय ईस मंदिर का इस्तेमाल किला समझकर किया जाता था, और ईसी कारण ईस मंदिर को दुर्गा मंदिर कहा जाता  हैं,लेकिन पर्यटक हमेशा इस बात से असमंजस में  होते है की ये मंदिर माँ दुर्गा को समर्पित हैं  लेकिन ऐसा नहीं हैं  ये मंदिर भगवान सूर्यदेव को समर्पित है। ये मंदिर पूर्वाभिमुख हैं। दुर्गा मंदिर का निर्माण सातवीं शती  में चालुक्य राजाओं ने किया था।  ये मंदिर गजपृष्ठ मंदिर शैली में आता हैं, जिसका मतलब होता है हाथी के पीठ के आकार का मंदिर ,ईस शैली में बने मंदिर भारत में बहुत ही कम है ईसका मूल कारण हैं ऐसे मंदिर बौद्ध धर्म में पाए जाते हैं। ...

कलबुर्गी (गुलबर्गा) का भव्य बुद्धविहार कर्नाटक Budha Vihar Kalburgi ( Gulbarga) Karnataka

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कलबुर्गी (गुलबर्गा) का भव्य बुद्धविहार कर्नाटक Budha Vihar Kalburgi ( Gulbarga) Karnataka दक्षिणी राज्य कर्नाटक का गुलबर्गा एक महत्त्व पूर्ण और चौथा सबसे बड़ा शहर है गुलबर्गा को कलबुर्गी के नाम से भी जाना जाता है।  गुलबर्गा उत्तरी कर्नाटक क्षेत्र में बसा है और बंगलुरु से ये ६२५ किमी की दुरी पर स्थित है मुंबई से ५३० किमी तथा हैदराबाद से महस २३० किमी की दुरी पर बसा है। गुलबर्गा में पर्यटकों को देखने के लिए गुलबर्गा फोर्ट,हजरत ख्वाजा बाँदा नवाज दरगाह और बुद्ध विहार प्रमुख पर्यटन स्थल है।    बुद्ध विहार गुलबर्गा विश्वविद्यालय के पास सेदम रोड पर जिला मुख्यालय से केवल 6 किलोमीटर दूर स्थित है। ये बुद्धविहार देश के सबसे बड़े बुद्धविहारो में से एक है जो की 18 एकड़ में फैला है,यहा एक मुख्य प्रार्थना कक्ष, तहखाने में एक ध्यान केंद्र और भूतल पर एक चैत्य गृह है । बुद्धविहार का गुंबद जो पारंपरिक बौद्ध वास्तुकला पर और साँची के स्तूप से प्रेरित होकर बनाया गया है, जिसकी की ऊंचाई 70 फीट और व्यास 59 फीट है। मुख्य गुंबद काफी भव्य है और पूरी तरह से संगेमरमर से बना है। गुंबद ...

तख़्त सचखंड श्री हुजूर साहिब नांदेड़ SHRI HUJUR SAHIB NANDED ਤਖ਼ਤ ਸੱਚਖੰਡ ਸ਼੍ਰੀ ਹੁਜ਼ੂਰ ਸਾਹਿਬ ਨੰਦੇੜ

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तख़्त सचखंड श्री हुजूर साहिब  नांदेड़ SHRI HUJUR SAHIB NANDED ਤਖ਼ਤ ਸੱਚਖੰਡ ਸ਼੍ਰੀ ਹੁਜ਼ੂਰ ਸਾਹਿਬ ਨੰਦੇੜ महाराष्ट्र के नांदेड़ में है तख्त सचखंड श्री हुजूर साहिब। यह गुरुद्वारा सिख धर्मों के पांच तख्तों में से एक है। यहां सिक्खों के दसवें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह जी ने अपना आखिरी समय बिताया था। गुरुद्वारे का निर्माण बिल्कुल उसी स्थान पर किया गया, जहां गुरु गोबिंद सिंह जी ने आखिरी बार दर्शन दिए थे। गुरुद्वारे के भीतरी कक्ष को 'अंगीठा साहिब' कहा जाता है। इसका निर्माण उस स्थान पर किया गया, जहां सन 1708 में गुरु गोबिंद सिंह जी आखिरी बार विद्यमान थे। गुरुद्वारे का निर्माण सन 1832 से 1837 के बीच पंजाब के महाराजा रणजीत सिंह के आदेश पर किया गया था। गुरु गोबिंद सिंह जी की यह अभिलाषा थी कि उनके परलोक चलाणा के बाद संतोख सिंह जी (जो उस समय सामुदायिक रसोईघर की देख-रेख करते थे) नांदेड़ में ही रहें और गुरु के लंगर को निरंतर चलाएं। गुरु साहिब ने कहा था कि बाकी संगत चाहे तो पंजाब वापिस जा सकती है लेकिन गुरु जी के प्रेम और बलिदान को देखते हुए संगत ने वापिस पंजाब जाने से मना कर दिया और नांदेड़ मे...

श्री दिगम्बर जैन सिद्ध क्षेत्र कुंथलगीरी उस्मानाबाद ( Kunthal Giri Osmanabad)

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श्री दिगम्बर जैन सिद्ध क्षेत्र कुंथलगीरी उस्मानाबाद ( Kunthal Giri Osmanabad) श्री दिगम्बर जैन सिद्ध क्षेत्र कुंथलगीरी  तालुका भूम जिला उस्मानाबाद में उस्मानाबाद से ६३ किमी उत्तर की और और बीड से दक्षिण की और बसा है। यंहा पर जैन साधु कुलभूषण और आदेश भूषण  नामक साधू ने तपचर्या कर मोक्ष प्राप्त कर लिया था. कुंथलगिरि क्षेत्र एक १७५ फ़ीट ऊँची पहाड़ीपर बसा है यंहा पर १२ से ज्यादा छोटे मोठे मंदिर है जिनमे कुलभूषण, देशभूषण मंदिर,आदिनाथ मंदिर आदिप्रमुख माने जाते है.  👇👇👇पूरा व्हिडीओ देखने के लिए निचे की लिंक पर क्लिक करे👇👇👇 Click below link to watch complete video 👇👇👇                                               https://www.youtube.com/watch?v=ucM1QQtCi44