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Navigating the Grid: A Complete Guide to Indian Railways' Zonal Hierarchy. Indian Railway Zone Extending across more than 68,000 kilometers of track, Indian Railways ranks among the planet's vastest transit networks. Overseeing such an extensive system from a single central command would create immense logistical bottlenecks. To ensure operational precision, safety standards, and regional responsiveness, the Ministry of Railways delegates governance through a decentralized structure of Railway Zones . Each zone operates as a semi-autonomous entity led by a General Manager (GM). These zones are further segmented into smaller localized territories known as Divisions , which are overseen by Divisional Railway Managers (DRMs). Comprehensive Breakdown of the 19 Zonal Divisions 1. Northern Railway (NR) Headquarters: New Delhi | Code: NR Operational Divisions: Delhi, Ambala, Firozpur, Lucknow (NR), Moradabad Profile: Covers the northern plains and holds the record for the larges...
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महाबलीपुरम के मंदीर तमिलनाडु MAHABALIPURAM GROUP OF MONUMENTS TAMILNADU
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महाबलीपुरम के मंदीर तमिलनाडु MAHABALIPURAM GROUP OF MONUMENTS TAMIL NADU
Shore Temple Mahabalipuram,Tamilnadu
महाबलीपुरम भारत के सबसे लोकप्रिय पर्यटन और धार्मिक स्थलों में से एक है महाबलीपुरम तमिलनाडु राज्य की राजधानी चेन्नई के दक्षिण में ५८ किमी दूर कोरोमंडल तट पर बसा एक प्राचीन शहर और बंदरगाह है जो की पल्लव राजयो कीतीसरी सदी से लेके आठवीं सदी तक उपराजधानी था।
इस शहर का नाम महान दानवीर असुर राजा महाबली के नाम पर रखा गया था। पल्लव राजा नरसिंह वर्मन जिन्हें 'मामल्ला' के नाम से जाना जाता था उन्होंने महाबलीपुरम का नाम मामल्लापुरम रख दिया था।आज ये स्थल दोने नाम प्रचिलित है।
महाबलीपुरम में सातवीं और आठवीं सदी में पल्लव राजाओ ने कई सारे दक्षिण भारतीय शैली में मंदिर बनावाये ये मंदिर द्रविड़ स्थापत्य कला का सबसे विकसित रूप माने जाते है ये मंदिर पल्लव नरेश नरसिंह वर्मन और महेंद्र वर्मन द्वारा निर्मित हैं।
महाबलीपुरम के मंदिर के पांच ग्रुप है इन्हे UNESCO ने अपने विश्व धरोहर स्थलों की सूचि में १९८४ में शामिल किया।
Shore Temple Mahabalipuram,Tamilnadu
शोर टेम्पल महाबलीपुरम के समुद्र तट पर स्थित यह मंदिर प्राचीन वास्तु कला का बेहतरीन उदहारण है। यँहा पर सातवीं और आठवीं सदी में सात मंदिर बनाये गए थे जो की भगवान विष्णु और भगवान शिव को समर्पिर्त थे सात में से आज केवल १ ही मंदिर अस्तित्व में है बाकि ६ मंदिर वक्त के साथ समंदर में समां गए।
PanchRatha Temple Mahabalipuram,Tamilnadu
पंच रथ मंदिर एक बड़ी चट्टान को तराशकर यंहा पर पांच मंदिर बनाये गए हैें ,इन मंदिरो को महाभारत के पांच पांडवो का नाम दिया है यंहा पर धर्मराज,भीम,अर्जुन,नकुल सहदेव और साथी में द्रोपदी का भी रथमंदिर हैं , धर्मराज का रथ मंदिर सबसे बड़ा है तो वही द्रोपदी का सबसे छोटा हैं अर्जुन के मंदिर के सामने विशाल हाथी है, मंदिर के अंदर पौराणिक कथाओं के कई प्रसंग को तराशा गया है।
Arjuna Penance/Descent of Ganga Mahabalipuram Tamilnadu
गंगा उद्गम का स्मारक-एक ९६ फ़ीट लम्बे पत्थर पर गंगा नदी का किस तरह से उद्गम हुवा ये पत्थर को तराशकर दिखाया गया है विशाल हाथी और अन्य वन्य जिव सहित भगीरथ और अर्जुन को तपस्या की मुद्रा में दिखाया गया हैं।
Krishna Butter Ball Mahabalipuram Tamilnadu
कृष्ण की मक्खन गेंद महाबलीपुरम में 1200 वर्ष पुराना एक पत्थर बहुत ही अजीबोगरीब तरीके से रखा हुआ है। जिसे देखते हुवे ऐसा लगता है की जरासा धक्का देने पर निचे लुढ़क जायेगा पर ऐसा होता नहीं। ग्रेविटी के नियमों की उपेक्षा करते हुए यह पत्थर एक ढलान वाली पहाड़ी पर 45 डिग्री के कोण पर बिना लुढ़के टिका हुआ है।ये पत्थर १७ फ़ीट लम्बा और २० फ़ीट ऊँचा है। उन्न्नीसवि सदी में कई सारे हाथिओं की मदत से हटाने की कोशीस की गई थी ,लेकिन ये अपनी जगह से जरा सा भी नहीं हिला। इस पत्थर को कृष्ण की मक्खन गेंद कहा जाता हैं।
इसके आलावा टाइगर केव्स जिसके चारो और शेर के सिर को उकेरा गया हैं। गणेश रथ, त्रिमूर्ति गुफा और महाबलीपुरम बिच पर्यटकों को अपनी और आकर्षित करते है।
कैसे पहुंचे ?
महाबलीपुरम पहुँचाने के लिए चेन्नई का हवाई अड्डा सबसे नजदीकी है जो की यंहा से ५८ किमी पर है। रेलवे से पहिचाने के लिए यंहा का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन भी चेन्नई ही है। महाबलीपुरम सडक मार्ग के माध्यम से आसपास के सभी बड़े शहरों से बहुत अच्छी तरह से जुड़ा हैं। पर्यटक बस से या अपनी निजी गाड़ी से भी महाबलीपुरम पहुँच सकते हैं।
कहा पर ठहरे ?
महाबलीपुरम में पर्यटकों को अपने बजट के अनुसार हर कैटगरी के होटल मिलेंगे।
सस्ते दाम में अच्छा होटल बुक करने के लिए निचे दिए लिंक पर जाकर होटल बुक किया जा सकता है।
हजरत ख्वाजा शेख फरीद शकरगंज गड शरीफ,उस्मानाबाद (Gad Sharif Osmanabad) हजरत ख्वाजा शेख फरीद शकरगंज गड शरीफ,उस्मानाबाद .उस्मानाबाद शहर से औरंगाबाद रोड पर १२ किमी की दूरी पर स्थित ये एक मशहूर दरगाह हैं, जंहा पर अपनी मन्नत मांगने के लिए हजारो की तादात पे श्रद्धालु हर दिन यँहा आते हैं । पहाड़ी से घिरे होने के कारण इसकी खूबसूरती देखने लायक होती है,यंहा से उस्मानाबाद रेलवे का मराठवाड़ा का सबसे ऊँचा ब्रिज और टनल का बेहद ही खूबसूरत नजारा दिखाई देता है। पूरा वीडियो देखने के लिए यंहा क्लीक करे.
तमिलनाडु घूमने के प्रमुख दस पर्यटन स्थल. Top 10 Tourist Attractions in Tamil Nadu. Kodaikanal तमिलनाडु दक्षिण भारत का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण राज्य है । तमिलनाडु दुनियाभर में अपने मंदिर के स्थापत्य कला के लिए जाना जाता है । वैसे देखा जाये तो तमिलनाडु में पर्यटकों को देखने लायक हर तरह के पर्यटन स्थल है समुद्री तट,खूबसूरत और भव्य पुरातन मंदिर,हिल स्टेशन मॉडर्न शहर .राष्ट्रीय उद्यान एंव वन्य जिव अभयरण्य तो चलिए इस ब्लॉग में हम जानते है तमिलनाडु में घूमने के प्रमुख दस पर्यटन स्थल। १० चिदंबरम Natraj Temple Chidambaram TamilNadu चिदंबरम चेन्नई से २१७ किमी और कांचीपुरम से १८९ किमी पर स्थित चिदंबरम कुड्डालोर जिले का एक तीर्थ शहर है। चिदंबरम नटराज मंदिर के लिए जाना जाता है, ये दक्षिण भारत में सबसे प्रसिद्ध तीर्थस्थलों में से एक है।चिदंबरम नटराज मंदिर 11 वीं शताब्दी के दौरान बनाया गया था और यह दक्षिण भारत में सबसे प्रसिद्ध शैव मंदिरों में से एक है। भगवान नटराज विक्रम चोल (1128 CE) और उनके उत्तराधिकारियों क...
त्रिविक्रम मंदिर (बौद्ध चैत्य गृह) तेर ,उस्मानाबाद भारत का सबसे प्राचीन मंदिर. Trivikram Mandir Ter Osmanabad,Maharashtra त्रिविक्रम मंदिर ये है भारत का सबसे प्राचीन मंदिरोमेसे एक है जो महाराष्ट्र के उस्मानाबाद शहर केवल २२ किमी की दूरी स्थित तेर गाव में हैं। सातवाहन राजाओ के समय ईस गांव का दायरा काफी बड़ा था और ये शहर भारत के प्रमुख शहरो में गिना जाता था ,तेर का उल्लेख इतिहास में 'तगर' के मिलता हैं,ये शहर सातवाहन राज्य की उपराजधानी भी हुवा करता था। तेर गांव के बीचोबीच एक बहुत ही रहस्यमय मंदिर हैं जो की भगवान त्रिविक्रम को समर्प्रित हैं। ईसी कारण रहस्य्मय है क्यों की ईस मंदिर की रचना आम हिन्दू मंदिरो की तरह नहीं हैं। कई इतिहासकारो का मानना है की ये एक प्राचीन बौद्ध चैत्य गृह है जिसका निर्माण मशहूर इतिहासकार कजिन्स के अनुसार ईसा ४ थी और इतिहासकार पर्सी ब्राऊन के अनुसार पांचवी सदी में किया गया था। त्रिविक्रम मंदिर तेर उस्मानाबाद महाराष्ट्र ईस चैत्य गृह का निर्माण पूरी तरह से ईटो से किया गया था,और ऊपर से चुने का प्लास्टर किया हैं और ईस तरह की ...
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