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Navigating the Grid: A Complete Guide to Indian Railways' Zonal Hierarchy. Indian Railway Zone Extending across more than 68,000 kilometers of track, Indian Railways ranks among the planet's vastest transit networks. Overseeing such an extensive system from a single central command would create immense logistical bottlenecks. To ensure operational precision, safety standards, and regional responsiveness, the Ministry of Railways delegates governance through a decentralized structure of Railway Zones . Each zone operates as a semi-autonomous entity led by a General Manager (GM). These zones are further segmented into smaller localized territories known as Divisions , which are overseen by Divisional Railway Managers (DRMs). Comprehensive Breakdown of the 19 Zonal Divisions 1. Northern Railway (NR) Headquarters: New Delhi | Code: NR Operational Divisions: Delhi, Ambala, Firozpur, Lucknow (NR), Moradabad Profile: Covers the northern plains and holds the record for the larges...
बादामी पहले वातापी के नाम से भी जाना जाता था। बादामी केव्स बागलकोट जिले के बदामी टाउन से केवल १ किमी दुरी पर एक पहाड़ी पर स्थित है। बादामी ५४० से ७५७ तक चुलक्या राजयो की राजधानी था और चालुक्य राजाओ का शाही निवास भी था।
बादामी अगस्त्य झील की वजह से दो विभागों में बटा हुवा है एक उत्तर बादामी पहाड़ी में बादामी का किला है तो वही दक्षिण में बादामी केव्स मौजूद है। ईस गुफाओं का निर्माण छठी और सातवीं शताब्दी में चालुक्य राजा कीर्तिवर्मन और मंगलेश के समय हुवा ज्यादातर गुफाओं का निर्माण मंगलेश साल ईसा ५९८ से साल ६१० ईसा में हुवा है। चार में से ३ गुंफा हिन्दू और एक गुफा जैन महावीर को समर्प्रित हैं।
गुंफा कमांक १
गुंफा क्रमांक एक दुनिया भर में मशहूर है १८ हाथ वाले नृत्य मुद्रा के शिव के लिए ये नटराज की मूर्ति ५ फ़ीट लम्बी है। गुफा के अंदर भूवराह,महिषासुर मर्दिनी, भगवान गणेश के बेहद की खूबसूरत शिल्प तराशे गए हैं। गुफा में कई सारी सुन्दर आकृतिया विशेष रूप से पुराणिक प्रसंग और व्यक्तिरेखा उकेरी गयी हैं। लक्ष्मी ,पार्वती , अर्धनरनारीश्वर की बेहद ही खूबसूरत मुर्तिया तराशी गए हैं।
गुंफा क्रमांक २
गुंफा नंबर २ पहिली गुफा से ऊपर की और बनी हैं ईस का निर्माण ७ वी शताब्दी के शुरू में किया था। ईस गुफा के बरामदा में भगवान् विष्णु का त्रिविक्रम अवतार में बली राजा का वध करते हुवे एक बहुत ही खूबसूरत मूर्ति तराशी गयी है ,तो वही विरुद्ध दिशा में भगवन विष्णु के वराह अवतार की भूदेवी को समुन्दर से ऊपर उठाने वाली मूर्ति पर्यटकों को अपनी और आकर्षित करती हैं। गुंफा के अंदर कई सारी पौराणिक कथा के शिल्प बनाये गए है जिसमे समुद्रमन्थन,बासुरी बजाते भगवान कृष्ण शामिल है। ये गुफा कुल ३३. फ़ीट लम्बी २३.५ फ़ीट चौड़ी और ११. फ़ीट ऊँची है।
गुंफा क्रमांक ३
ये बादामी की सबसे बड़ी गुंफा है जो की ६५ फ़ीट लम्बी ४८ फ़ीट चौड़ी और १५ फ़ीट ऊँची है ये गुंफा वैष्णव मंदिर है ,यँहा पर आधी भगवान् विष्णु और आधी भगवान् शिव की मूर्ती है। बरामदामें भगवान् विष्णु की शेषनाग पर बैठी बेहद ही खूबसूरत मूर्ती है ,छत पर फ्रेस्को पेंटिंग भी देखने को मिलती हैं, और ये दक्षिण भारत का चित्रकारी का सबसे पहला उदहारण माना जाता है। गुफा में भगवान् त्रिविक्रम,वासुदेव, हरिहर, ब्रम्हा अदि हिन्दू देवीदेवताओं के सुन्दर शिप्ल तराशे गए हैं। गुफा के छत पर भी बड़े पैमाने पर काफी अलंकृत शिल्प तराशे गए हैं।
गुंफा क्रमांक ४
ये गुफा जैन धर्मीय है, ऐ भगवान् महावीर को समर्प्रित है, ये गुंफा क्रमांक ३ के पूर्वी दिशा में काफी नजदीक है और ये सब गुफाओं में आकर में सबसे छोटी है। ईसका निर्माण पहले तीन गुंफा के बाद किया होगा ऐसा इतिहासकारो का मानना है,जो की सम्भयता ११ या १२ शताब्दी में किया होगा। गुंफा के अंदर बाहुबली ,पार्श्वनाथ और भगवान महावीर की बेहद ही खूबसूरत मुर्तिया तराशी गयी है। गुफा के गर्भगृह में भगवान महावीर की मूर्ती विराजमान हैं।
ईन चार गूंफा के अलावा भूतनाथ मंदिर के पास और एक गूंफा हैं। जो संभाव्यता भगवान बुद्ध को समर्प्रित है मूल मूर्ती को काफी नुकसान पहुँचाया गया हैं।
कैसे पहुंचे ?
बादामी किला बादामी के प्रमुख बस स्टैंड से केवल १ किमी दूर है जिसे पर्यटक वाइडल या ऑटो रिक्शा से भी पहुंचसकते हैं। बादामी मैसूरु बागलकोट और हुबली जैसे बड़े शहरो से राष्ट्रीय मार्ग से जुड़ा हुवा हैं। बादामी सोलापुर-होस्पेट रेलवे मार्ग पर स्थित एक महत्वपूर्ण रेलवे स्थानक हैं। देश के प्रमुख शहर से बादामी के लिए रेलवे हर रोज चलती हैं, जिसमे मैसूरु, बंगलुरु,सोलापुर,मुंबई,पुणे,बागलकोट,विजापुर शामिल हैं। बदामी से सबसे नजदीकी हवाई अड्डा खाई बेलगाव की १९० किमी दूर हैं। जो देश के प्रमुख शहरो से हवाई यातायात से जुड़ा हैं।
कहाँ पर ठहरे ?
बदामी में रहने के लिए ३ स्टार और १ स्टार होटल मिलेंगे साथ ही कर्नाटक पर्यटन विभाग से भी यंहा पर होटल्स चलाये जाते हैं। सस्ते दाम में अच्छा होटल बुक करने के लिए निचे दिए गए लिंक पर जाकर आप अपना होटल बुक कर सकते हैं।
हजरत ख्वाजा शेख फरीद शकरगंज गड शरीफ,उस्मानाबाद (Gad Sharif Osmanabad) हजरत ख्वाजा शेख फरीद शकरगंज गड शरीफ,उस्मानाबाद .उस्मानाबाद शहर से औरंगाबाद रोड पर १२ किमी की दूरी पर स्थित ये एक मशहूर दरगाह हैं, जंहा पर अपनी मन्नत मांगने के लिए हजारो की तादात पे श्रद्धालु हर दिन यँहा आते हैं । पहाड़ी से घिरे होने के कारण इसकी खूबसूरती देखने लायक होती है,यंहा से उस्मानाबाद रेलवे का मराठवाड़ा का सबसे ऊँचा ब्रिज और टनल का बेहद ही खूबसूरत नजारा दिखाई देता है। पूरा वीडियो देखने के लिए यंहा क्लीक करे.
तमिलनाडु घूमने के प्रमुख दस पर्यटन स्थल. Top 10 Tourist Attractions in Tamil Nadu. Kodaikanal तमिलनाडु दक्षिण भारत का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण राज्य है । तमिलनाडु दुनियाभर में अपने मंदिर के स्थापत्य कला के लिए जाना जाता है । वैसे देखा जाये तो तमिलनाडु में पर्यटकों को देखने लायक हर तरह के पर्यटन स्थल है समुद्री तट,खूबसूरत और भव्य पुरातन मंदिर,हिल स्टेशन मॉडर्न शहर .राष्ट्रीय उद्यान एंव वन्य जिव अभयरण्य तो चलिए इस ब्लॉग में हम जानते है तमिलनाडु में घूमने के प्रमुख दस पर्यटन स्थल। १० चिदंबरम Natraj Temple Chidambaram TamilNadu चिदंबरम चेन्नई से २१७ किमी और कांचीपुरम से १८९ किमी पर स्थित चिदंबरम कुड्डालोर जिले का एक तीर्थ शहर है। चिदंबरम नटराज मंदिर के लिए जाना जाता है, ये दक्षिण भारत में सबसे प्रसिद्ध तीर्थस्थलों में से एक है।चिदंबरम नटराज मंदिर 11 वीं शताब्दी के दौरान बनाया गया था और यह दक्षिण भारत में सबसे प्रसिद्ध शैव मंदिरों में से एक है। भगवान नटराज विक्रम चोल (1128 CE) और उनके उत्तराधिकारियों क...
त्रिविक्रम मंदिर (बौद्ध चैत्य गृह) तेर ,उस्मानाबाद भारत का सबसे प्राचीन मंदिर. Trivikram Mandir Ter Osmanabad,Maharashtra त्रिविक्रम मंदिर ये है भारत का सबसे प्राचीन मंदिरोमेसे एक है जो महाराष्ट्र के उस्मानाबाद शहर केवल २२ किमी की दूरी स्थित तेर गाव में हैं। सातवाहन राजाओ के समय ईस गांव का दायरा काफी बड़ा था और ये शहर भारत के प्रमुख शहरो में गिना जाता था ,तेर का उल्लेख इतिहास में 'तगर' के मिलता हैं,ये शहर सातवाहन राज्य की उपराजधानी भी हुवा करता था। तेर गांव के बीचोबीच एक बहुत ही रहस्यमय मंदिर हैं जो की भगवान त्रिविक्रम को समर्प्रित हैं। ईसी कारण रहस्य्मय है क्यों की ईस मंदिर की रचना आम हिन्दू मंदिरो की तरह नहीं हैं। कई इतिहासकारो का मानना है की ये एक प्राचीन बौद्ध चैत्य गृह है जिसका निर्माण मशहूर इतिहासकार कजिन्स के अनुसार ईसा ४ थी और इतिहासकार पर्सी ब्राऊन के अनुसार पांचवी सदी में किया गया था। त्रिविक्रम मंदिर तेर उस्मानाबाद महाराष्ट्र ईस चैत्य गृह का निर्माण पूरी तरह से ईटो से किया गया था,और ऊपर से चुने का प्लास्टर किया हैं और ईस तरह की ...
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