Navigating the Grid: A Complete Guide to Indian Railways' Zonal Hierarchy.

चित्र
  Navigating the Grid: A Complete Guide to Indian Railways' Zonal Hierarchy. Indian Railway Zone Extending across more than 68,000 kilometers of track, Indian Railways ranks among the planet's vastest transit networks. Overseeing such an extensive system from a single central command would create immense logistical bottlenecks. To ensure operational precision, safety standards, and regional responsiveness, the Ministry of Railways delegates governance through a decentralized structure of Railway Zones . Each zone operates as a semi-autonomous entity led by a General Manager (GM). These zones are further segmented into smaller localized territories known as Divisions , which are overseen by Divisional Railway Managers (DRMs). Comprehensive Breakdown of the 19 Zonal Divisions 1. Northern Railway (NR) Headquarters: New Delhi | Code: NR Operational Divisions: Delhi, Ambala, Firozpur, Lucknow (NR), Moradabad Profile: Covers the northern plains and holds the record for the larges...

राणी की वाव,पाटण गुजरात RANI KI VAV PATAN GUJRAT

राणी की वाव,पाटण गुजरात Rani Ki Vav, Patan Gujrat.







पश्चिमी भारत में स्टेपवेल का इतिहास सिंध घाटी सभ्यता से शुरू होता हैं। पश्चिमी भारत में ख़ास तौर पर गुजरात  अपने स्टेपवेल के लिए जाना जाता हैं गुजरात में अबतक लगभग १२० स्टेपवेल की खोज हुवी हैं। इनमे स्टेपवेल स्थापत्य  कला का परमोच्च बिंदु है पाटण स्थित राणी  की वाव। उत्तरी गुजरात के पाटण  जिले में राणी  की वाव का निर्माण संन १०६३ में सोलंकी राजा भीमदेव प्रथम  की पत्नी उदयमति ने करवाया था। राजा भीमदेव प्रथम  सोलंकी वंश के संस्थापक थे। पाटण ६५० साल तक  गुजरात की राजधानी था बाद में इसे आज के अहमदाबाद में विस्थापित किया। राणी की वाव मारु गुर्जरा स्थापत्य कला का बेजोड़ नमूना माना जाता है,राणी की वाव का निर्माण १०६३  में सरस्वती नदी के किनारे किया था बाद में समय के साथ ये वाव में नदी से मिटटी और पत्थर भरने से ये कुवा पूरी तरह से भर गया था। 




१९४० में में बरोदा स्टेट ने ईसकी फिर से खोज की १९८० में भारतीय पुरातत्व विभाग द्वारा यंहा पर बड़ी मात्रा में  खुदाई  की १९८१ से लेके १९८७ तक भारतीय पुरातत्व विभाग द्वारा ईस वाव को पुनस्थापित किया गया। राणी की वाव देश में पाए जाने वाले स्टेपवेल में सबसे विशाल है, जो की ६५ मीटर लम्बी ३० मीटर चौड़ी और २८ मीटर गहरी है, ये वाव कुल सात मंजिला है, २१२ खम्बे से ईसके सात मंजिले बनाएं हैं।  खम्बे नकाशी से सजाये गए है। पूरी राणी की वाव में पौराणिक कथाओं से भरी हैं  खास तौर पर भगवान विष्णु के दशावतारों की मुर्तिया तराशी गयी है, ईनमे कल्कि,भुवराह,वामन,नरसिंहा ,राम, और बुद्ध  अवतार भी शामिल हैं।पुरे वाव में कुल ७०० से भी ज्यादा बड़ी मुर्तिया है और हजारो की सख्या में छोटी मुर्तिया तराशी गयी है ईसमें राणी  उदयमति की भी मूर्ति उकेरी गए हैं। साल २०१४ में राणी की वाव को UNESCO द्वारा विश्व धरोहर स्थल का दर्जा दिया गया। 


कैसे पहुंचे

 पाटण अहमदाबाद से ३.५ घंटे की दुरी पर है तो वही महासना से ५० किमी दूर हैं, यंहा से रेगुलर बसेस पाटण के लिए चलती  है। महासना जंक्शन से पाटण के लिए प्रतिदिन रेलवे चलती हैं। अहमदाबाद यँहा का सबसे नजदीकी एयरपोर्ट हैं,जो की १३० किमी दूर हैं।





सस्ते दाम में अच्छा होटल बुक करने के लिए निचे दिए लिंक पर जाकर होटल बुक किया जा सकता है। 

👉👉Click here to book Hotels in Mahesana👈👈



👇👇👇Click below link to watch complete video👇👇👇



टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

हजरत ख्वाजा शेख फरीद शकरगंज गड शरीफ,उस्मानाबाद (Gad Sharif Osmanabad)

तमिलनाडु घूमने के प्रमुख दस पर्यटन स्थल ( Top 10 Tourist Attractions in Tamil Nadu)

त्रिविक्रम मंदिर (बौद्ध चैत्य गृह) तेर ,उस्मानाबाद भारत का सबसे प्राचीन मंदिर. (Trivikram Temple (Chaitya Gruh)) Ter Osmanabad Oldest Temple In India )